Sunday, March 17, 2013

समाज के ठेकेदार

समाज के ठेकेदारों ने बोलना शुरू कर दिया है

उनके तख़्त में थोड़ी सी भी आंच आती है तो वे विचलित हो जाते हैं, 


औरत अगर सशक्त होगी, उसका उत्थान होगा 


अगर दलितों की आवाज़ बुलंद होगी 


तो ब्राह्मणवाद-मौल्वीवाद का पतन निश्चित है 


अपनी गद्दी, समाज में अपनी शक्ति बचा के रखने के लिए बोल रहे हैं 


और उनका समर्थन कर रहे हैं वो - जो अपनी पत्नी को अपनी जूती पर 
रखना पसंद करते हैं 


अपने नौकर चाकर का शोषण करने, उनको उनकी ज़ात का कहने, 
उनको मारने पीटने में गर्व महसूस करते हैं 


और उनका समर्थन वो महिलाएं भी कर रहीं हैं जो अपने उत्पीड़न से 
समायोजित महसूस करती हैं 


समाज के ठेकेदारों ने बोलना शुरू कर दिया है...

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